Sanskrit

यः सोमः॑ क॒लशे॒ष्वाँ अ॒न्तः प॒वित्र॒ आहि॑तः । तमिन्दुः॒ परि॑ षस्वजे ॥ (५)

Hindi

कलशों एवं दशापवित्र नामक पात्र में रखे सोमरस की किरणों में सोमदेव प्रवेश करते हैं. (५)

English

Somdev enters the rays of somras kept in the kalash and a vessel called Dashapavitra. (5)