Sanskrit

ए॒ष पु॒रू धि॑यायते बृह॒ते दे॒वता॑तये । यत्रा॒मृता॑स॒ आस॑ते ॥ (२)

Hindi

जिस विशाल यज्ञ में देवगण बैठते हैं, उस में सोम बहुत से कर्मो की इच्छा करते हैं. (२)

English

In the huge yagna in which the devas sit, Som desires many deeds. (2)