Sanskrit

स॒मु॒द्रो अ॒प्सु मा॑मृजे विष्ट॒म्भो ध॒रुणो॑ दि॒वः । सोमः॑ प॒वित्रे॑ अस्म॒युः ॥ (५)

Hindi

रसक्षरण करने वाले एवं स्वर्ग के धारणकर्तता सोम संसार को धारण करते हुए हमें चाहते हैं एवं जल में शुद्ध होते हैं. (५)

English

The raspanakaras and the possessors of heaven, soma, holding the world, wants us and is cleansed in water. (5)