Sanskrit
आ नः॑ सोम॒ सहो॒ जुवो॑ रू॒पं न वर्च॑से भर । सु॒ष्वा॒णो दे॒ववी॑तये ॥ (१८)
Hindi
हे देवों की प्रसन्नता के लिए निचुड़ते हुए सोम! हमें सर्वत्र गमनयोग्य बल एवं सर्वत्र प्रकाश के नए रूप दो. (१८)
English
O Som, for the pleasure of the gods! Give us a new form of force and light everywhere. (18)
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