Sanskrit

दि॒वो यः स्क॒म्भो ध॒रुणः॒ स्वा॑तत॒ आपू॑र्णो अं॒शुः प॒र्येति॑ वि॒श्वतः॑ । सेमे म॒ही रोद॑सी यक्षदा॒वृता॑ समीची॒ने दा॑धार॒ समिषः॑ क॒विः ॥ (२)

Hindi

स्वर्गलोक को स्तंभित करने वाले, धरती के धारणकर्ता, सब जगह विस्तृत एवं पात्रों में भरे हुए सोम की किरणें चारों ओर जाती हैं. सोम ने विस्तृत द्यावा-पृथिवी को धारण किया था. यज्ञकर्म करने वाले सोम स्तोताओं को अन्न दें. (२)

English

The rays of The Mon, who has stunned the paradise, the possessor of the earth, are spread all over the place and filled in characters. Som had held the elaborate dyava-prithvivi. Give food to the som stotas who perform yajnakarma. (2)