1.10.5Samved
मंत्र:१.१०.५ (1.10.5)खंड (१०)

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मंत्र:१.१०.५ (1.10.5)खंड (१०)

प्रत्यग्ने हरसा हरः श‍ृणाहि विश्वतस्परि । यातुधानस्य रक्षसो बलं न्युब्जवीर्यम् ॥ (५)

हे अग्नि! आप अपने तेज से यातना देने वाले राक्षसों को सब ओर (प्रकार) से नष्ट कर दीजिए. (५)

O agni! Destroy your sharply tortured demons everywhere (types). (5)