1.4.2Samved
मंत्र:१.४.२ (1.4.2)खंड (४)

Shlok 1 of 1

मंत्र:१.४.२ (1.4.2)खंड (४)

पाहि नो अग्न एकया पाह्यू३त द्वितीयया । पाहि गीर्भिस्तिसृभिरूर्जां पते पाहि चतसृभिर्वसो ॥ (२)

हे अग्नि! आप पहली स्तुति से हमारी रक्षा कीजिए. दूसरी स्तुति से हमें संरक्षण प्रदान कीजिए. तीसरी स्तुति से हमारी रक्षा (पालनपोषण रूप) कीजिए. चौथी स्तुति से आप हमारी सब प्रकार से रक्षा कीजिए. हे अग्नि! आप सब को संरक्षण देने वाले हैं. (२)

O agni! You protect us from the first praise. Protect us with the second praise. Protect us from the third praise. Protect us in every way with the fourth praise. O agni! You are going to protect everyone. (2)