1.7.4Samved
मंत्र:१.७.४ (1.7.4)खंड (७)

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मंत्र:१.७.४ (1.7.4)खंड (७)

इमँ स्तोममर्हते जातवेदसे रथमिव सं महेमा मनीषया । भद्रा हि नः प्रमतिरस्य सँसद्यग्ने सख्ये मा रिषामा वयं तव ॥ (४)

हे अग्नि! आप सब कुछ जानने वाले हैं. हम स्तोत्र रूप को रथ के समान उत्तम बुद्धि से तैयार करते हैं. हे अग्नि! हम आप के मित्र हैं. हमें किसी प्रकार का कोई कष्ट न हो. (४)

O agni! You are going to know everything. We prepare the stotra form with the best intelligence like a chariot. O agni! We are your friends. We should not have any kind of trouble. (4)