1.9.3Samved
मंत्र:१.९.३ (1.9.3)खंड (९)

Shlok 1 of 1

मंत्र:१.९.३ (1.9.3)खंड (९)

त्वेषस्ते धूम ऋण्वति दिवि सं च्छुक्र आततः । सूरो न हि द्युता त्वं कृपा पावक रोचसे ॥ (३)

हे अग्नि! प्रज्वलित होने के बाद आप का धुआं आकाश में फैलता है. बादल रूप में बदल जाता है. आप पवित्र करने वाले हैं. स्तुति के प्रभाव से आप सूर्य के समान प्रकाशित होते हैं. (३)

O agni! After igniting, your smoke spreads in the sky. Turns into cloud form. You are going to sanctify. With the effect of praise, you are illuminated like the sun. (3)