1.9.8Samved
मंत्र:१.९.८ (1.9.8)खंड (९)
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बृहद्वयो हि भानवेऽर्चा देवायाग्नये । यं मित्रं न प्रशस्तये मर्तासो दधिरे पुरः ॥ (८)
हे अग्नि! आप तेजस्वी हैं. आप के लिए बहुत सा हवि का अन्न दिया जाता है. हम प्रकाश वाले आप की पूजा करते हैं. हम आप को मित्र के समान मानते हैं. हम उत्तम स्तुति करने के लिए आप को आगे कर के स्थापित करते हैं. (८)
O agni! You are stunning. A lot of food is given to you. We worship you with light. We treat you as a friend. We set you up by putting forward the best praise. (8)