2.3.10Samved
मंत्र:२.३.१० (2.3.10)खंड (३)

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मंत्र:२.३.१० (2.3.10)खंड (३)

प्र सम्राजं चर्षणीनामिन्द्रँ स्तोता नव्यं गीर्भिः । नरं नृषाहं मँहिष्ठम् ॥ (१०)

मनुष्यों में इंद्र भली प्रकार प्रकाशित हैं. वे स्तुति करने योग्य हैं. शत्रुओं को जीतने वाले हैं. हम उन महान इंद्र की स्तुति करते हैं. (१०)

Indra is well published in humans. They are praiseworthy. Enemies are going to win. We praise those great Indras. (10)