25.27Yajurved
Sanskrit
यद्ध॑वि॒ष्यमृतु॒शो दे॑व॒यानं॒ त्रिर्मानु॑षाः॒ पर्यश्वं॒ नय॑न्ति।अत्रा॑ पू॒ष्णः प्र॑थ॒मो भा॒गऽए॑ति य॒ज्ञं दे॒वेभ्यः॑ प्रतिवे॒दय॑न्न॒जः ॥ (२७)
Hindi
जब यजमान हव्रि को तीन देवमार्गों से चारों ओर घोड़े की तरह ले जाते हैं, तब यहां यह अज पोषण का प्रथम भाग पा कर देवताओं के लिए यज्ञ का प्रतिवेदन करता है. (२७)
English
When the host carries havri around like a horse through three gods, here he finds the first part of the nutrition and reports the yajna to the gods. (27)
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