29.30Yajurved
Sanskrit
व्यच॑स्वतीरुर्वि॒या वि श्र॑यन्तां॒ पति॑भ्यो॒ न जन॑यः॒ शुम्भ॑मानाः।देवी॑र्द्वारो बृहतीर्विश्वमिन्वा दे॒वेभ्यो॑ भवत सुप्राय॒णाः ॥ (३०)
Hindi
जैसे स्त्रयां शृंगार कर के पति को थकान रहित करती हैं, वैसे ही दिव्य द्वार बाली विशाल देवियां देवताओं के लिए सुगमता से प्रयास करने वाली हों. (३०)
English
Just as women adorn and make the husband tired, in the same way, the huge goddesses with divine doors should be easy to strive for the gods. (30)
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