Sanskrit

आ रोद॑सीऽअपृण॒दा स्व॑र्म॒हज्जा॒तं यदे॑नम॒पसो॒ऽअधा॑रयन्।सोऽअ॑ध्व॒राय॒ परि॑ णीयते क॒विरत्यो॒ न वाज॑सातये॒ चनो॑हितः ॥ (७५)

Hindi

स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक में अग्नि को यजमान धारण करते हैं. अग्नि सब को प्रकाशित करते हैं. यज्ञ के लिए हम अग्नि का वरण करते हैं. जैसे घोड़ा सब ओर विचरता है, वैसे ही अग्नि सब ओर विचरते हैं. (७५)

English

In heaven and earth, agni is hosted. Agni illuminates everyone. We use agni for yajna. Just as a horse wanders everywhere, agni moves everywhere. (75)