1.3.6Atharvaved
मंत्र:१.३.६ (1.3.6)सूक्त (३)
Shlok 1 of 1
यदा॒न्त्रेषु॑ गवी॒न्योर्यद्व॒स्तावधि॒ संश्रु॑तम् । ए॒वा ते॒ मूत्रं॑ मुच्यतां ब॒हिर्बालिति॑ सर्व॒कम् ॥ (६)
जो मूत्र तेरी आंतों में, मूत्रनाड़ी में एवं मूत्राशय में रुका हुआ है, वह तेरा सारा मूत्र शब्द करता हुआ शीघ्र बाहर निकल आए. (६)
The urine that is stopped in your intestines, in the ureter and in the bladder, let it come out quickly, saying all your urine. (6)