1.3.7Atharvaved
मंत्र:१.३.७ (1.3.7)सूक्त (३)

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मंत्र:१.३.७ (1.3.7)सूक्त (३)

प्र ते॑ भिनद्मि॒ मेह॑नं॒ वर्त्रं॑ वेश॒न्त्या इ॑व । ए॒वा ते॒ मूत्रं॑ मुच्यतां ब॒हिर्बालिति॑ सर्व॒कम् ॥ (७)

हे मूत्र व्याधि से पीड़ित रोगी! मैं तेरे मूत्र निकलने के मार्ग का उसी प्रकार भेदन करता हूं, जिस प्रकार जलाशय का जल बाहर निकालने के लिए नाली खोदते हैं. तेरा सारा मूत्र शब्द करता हुआ बाहर निकले. (७)

O patient suffering from urinary disease! I pierce the path of your urine in the same way as you dig a drain to drain out the water of the reservoir. All your urine came out saying words. (7)