1.4.3Atharvaved
मंत्र:१.४.३ (1.4.3)सूक्त (४)

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मंत्र:१.४.३ (1.4.3)सूक्त (४)

अ॒पो दे॒वीरुप॑ ह्वये॒ यत्र॒ गावः॒ पिब॑न्ति नः । सिन्धु॑भ्यः॒ कर्त्वं॑ ह॒विः ॥ (३)

मैं स्वच्छ एवं देवता रूप जलों का आह्वान करता हूं. जल से पूर्ण जलाशयों अर्थात्‌ नदियों और तालाबों में हमारी गाएं जल पीती हैं. (३)

I call for clean and deity waters. Our cows drink water in water-filled reservoirs i.e. rivers and ponds. (3)