10.3.4Atharvaved
मंत्र:१०.३.४ (10.3.4)सूक्त (३)
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अ॒यं ते॑ कृ॒त्यां वित॑तां॒ पौरु॑षेयाद॒यं भ॒यात् । अ॒यं त्वा॒ सर्व॑स्मात्पा॒पाद्व॑र॒णो वा॑रयिष्यते ॥ (४)
तेरे निमित्त जो कृत्या बनाई गई है, यह वरण वृक्ष से निर्मित मणि उस को प्रभावहीन बना देगी एवं तुझे भयरहित कर देगी. दिव्य वनस्पति से निर्मित यह मणि तेरे सभी पापों का विनाश कर देगी. (४)
The work that has been made for you, this gem made from the tree will make it ineffective and will make you fearless. This gem made of divine vegetation will destroy all your sins. (4)