10.3.5Atharvaved
मंत्र:१०.३.५ (10.3.5)सूक्त (३)

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मंत्र:१०.३.५ (10.3.5)सूक्त (३)

व॑र॒णो वा॑रयाता अ॒यं दे॒वो वन॒स्पतिः॑ । यक्ष्मो॒ यो अ॒स्मिन्नावि॑ष्ट॒स्तमु॑ दे॒वा अ॑वीवरन् ॥ (५)

दिव्य गुणों से संपन्न यह वरण वृक्ष से निर्मित मणि हमारे शरीर में प्रविष्ट यक्ष्मा रोग के साथ हमारे शत्रुओं को भी समाप्त कर देगी. (५)

This gem made from this varan tree, endowed with divine qualities, will also eliminate our enemies with tuberculosis disease entered our body. (5)