10.3.6Atharvaved
मंत्र:१०.३.६ (10.3.6)सूक्त (३)

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मंत्र:१०.३.६ (10.3.6)सूक्त (३)

स्वप्नं॑ सु॒प्त्वा यदि॒ पश्या॑सि पा॒पं मृ॒गः सृ॒तिं यति॒ धावा॒दजु॑ष्टाम् । प॑रिक्ष॒वाच्छ॒कुनेः॑ पापवा॒दाद॒यं म॒णिर्व॑र॒णो वा॑रयिष्यते ॥ (६)

हे पुरुष! वरण वृक्ष से निर्मित यह मणि पापपूर्ण स्वप्न के भय से, अनिच्छित दिशा की ओर दौड़ने वाले मृग से, छींक से तथा कौआ आदि पक्षी से संबंधित अपशकुनों से तुझे बचाएगी. (६)

O man! This gem made from the varan tree will protect you from the fear of a sinful dream, from the antelope running towards the desired direction, from the sneeze and from the bad omens related to the crow etc. (6)