10.4.5Atharvaved
मंत्र:१०.४.५ (10.4.5)सूक्त (४)

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मंत्र:१०.४.५ (10.4.5)सूक्त (४)

पै॒द्वो ह॑न्ति कस॒र्णीलं॑ पै॒द्वः श्वि॒त्रमु॒तासि॒तम् । पै॒द्वो र॑थ॒र्व्याः शिरः॒ सं बि॑भेद पृदा॒क्वाः ॥ (५)

पैद्व नामक ओषधि कसर्णील नामक सर्प को, श्वेत सर्प को और काले सर्प को नष्ट करती है. पैद्ध ने रथर्व्या और पृदाकू नामक नागों का सिर तोड़ दिया था. (५)

A medicine called Padwa destroys a snake called Kasarnil, a white snake and a black snake. Paddha broke the heads of serpents named Rathrvya and Pridaku. (5)