10.4.8Atharvaved
मंत्र:१०.४.८ (10.4.8)सूक्त (४)
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संय॑तं॒ न वि ष्प॑र॒द्व्यात्तं॒ न सं य॑मत् । अ॒स्मिन्क्षेत्रे॒ द्वावही॒ स्त्री च॒ पुमां॑श्च॒ तावु॒भाव॑र॒सा ॥ (८)
सर्प का बंद मुख हमें डसने के लिए न खुले. इस क्षेत्र में निवास करने वाले नर और मादा सर्प अर्थात् सांप और सांपिन मंत्र की शक्ति से शक्तिहीन हो जाएं. (८)
The snake's closed face should not open to bite us. Male and female snakes living in this area i.e. snakes and snakes should become powerless with the power of mantras. (8)