10.6.5Atharvaved
मंत्र:१०.६.५ (10.6.5)सूक्त (६)

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मंत्र:१०.६.५ (10.6.5)सूक्त (६)

तस्मै॑ घृ॒तं सुरां॒ मध्वन्न॑मन्नं क्षदामहे । स नः॑ पि॒तेव॑ पु॒त्रेभ्यः॒ श्रेयः॑ श्रेयश्चिकित्सतु॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्वो॑ दे॒वेभ्यो॑ म॒णिरेत्य॑ ॥ (५)

हम इस अतिथि के लिए घृत, मदिरा, शहद और अन्न देते हैं. जिस प्रकार पिता पुत्र को परम कल्याण देता है, उसी प्रकार यह मणि मुझे कल्याण दे. यह मणि देवों के समीप से मेरे पास आ कर बारबार और प्रतिदिन मुझे सुख प्रदान करे. (५)

We give ghee, wine, honey and food for this guest. Just as the Father gives the Son the ultimate welfare, so may this gem give me welfare. May this gem come to me from near the gods and give me happiness again and again and every day. (5)