10.7.3Atharvaved
मंत्र:१०.७.३ (10.7.3)सूक्त (७)
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कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठति॒ भूमि॑रस्य॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठत्य॒न्तरि॑क्षम् । कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्याहि॑ता॒ द्यौः कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्युत्त॑रं दि॒वः ॥ (३)
इस परमात्मा के किस अंग में भूमि स्थित रहती है? इस के किस अंग में अंतरिक्ष होता है? यह दृढ़ द्यौ इस के किस अंग में स्थित है? ऊंचा स्वर्ग इस के किस अंग में स्थित है? (३)
In which part of this God is the land located? Which part of it contains space? In which part of this rigid dyau is it located? In which part of this high heaven is it located? (3)