10.7.4Atharvaved
मंत्र:१०.७.४ (10.7.4)सूक्त (७)
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क्व प्रेप्स॑न्दीप्यत ऊ॒र्ध्वो अ॒ग्निः क्व प्रेप्स॑न्पवते मात॒रिश्वा॑ । यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्या॒वृतः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः ॥ (४)
ऊपर की ओर चलने वाली अग्नि, कहां जाने की इच्छा से प्रज्वलित होती है? वायु कहां जाने की इच्छा करती हुई चलती हैं? आवागमन के चक्कर में पड़े हुए प्राणी जहां जाने की इच्छा से गतिशील हैं, उस जगदाधार का वर्णन करो कि वह कौन है. (४)
The agni, moving upwards, ignites by the desire to go? Where does the air go? Where the creatures in the pursuit of movement are moving with the desire to go, describe who it is. (4)