11.5.3Atharvaved
मंत्र:११.५.३ (11.5.3)सूक्त (५)
Shlok 1 of 1
ए॒तस्मा॒द्वा ओ॑द॒नात्त्रय॑स्त्रिंशतं लो॒कान्निर॑मिमीत प्र॒जाप॑तिः ॥ (३)
प्रजापति ने समस्त जगत् के उपादान के रूप में इस ओदन से तैंतीस देव लोकों को बनाया. (३)
Prajapati made thirty-three dev lokas from this odan as a gift to the whole world. (3)