12.3.1Atharvaved
मंत्र:१२.३.१ (12.3.1)सूक्त (३)

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मंत्र:१२.३.१ (12.3.1)सूक्त (३)

पुमा॑न्पुं॒सोऽधि॑ तिष्ठ॒ चर्मे॑हि॒ तत्र॑ ह्वयस्व यत॒मा प्रि॒या ते॑ । याव॑न्ता॒वग्रे॑ प्रथ॒मं स॑मे॒यथु॒स्तद्वां॒ वयो॑ यम॒राज्ये॑ समा॒नम् ॥ (१)

हे पुरुषार्थ वाले पुरुष! तू इस पशु धर्म पर चढ़ जा. तू अपने प्रिय व्यक्तियों को भी बुला ले. पहले जितने पतिपात्नियों ने इस कार्य को किया, उन का और तुम्हारा समान फल हो. (१)

O man of effort! You go ahead with this animal dharma. Call your loved ones too. May all the husbands who have done this work before have the same fruit and you. (1)