12.3.8Atharvaved
मंत्र:१२.३.८ (12.3.8)सूक्त (३)
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दक्षि॑णां॒ दिश॑म॒भि नक्ष॑माणौ प॒र्याव॑र्तेथाम॒भि पात्र॑मे॒तत् । तस्मि॑न्वां य॒मः पि॒तृभिः॑ संविदा॒नः प॒क्वाय॒ शर्म॑ बहु॒लं नि य॑च्छात् ॥ (८)
हे पति और पत्नी! तुम दक्षिण की ओर जा कर इस की प्रदक्षिणा करते हुए आओ. असमय पितरों से सहमत हुए यमराज तुम्हारे ओदन के लिए अनेक प्रकार के कल्याण प्रदान करें. (८)
O husband and wife! You go south and come circumambulating it. Yamraj, who agreed with the untimely ancestors, should provide many types of welfare for your odan. (8)