13.1.10Atharvaved
मंत्र:१३.१.१० (13.1.10)सूक्त (१)
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यास्ते॒ विश॒स्तप॑सः संबभू॒वुर्व॒त्सं गा॑य॒त्रीमनु॒ ता इ॒हागुः॑ । तास्त्वा॑ विशन्तु॒ मन॑सा शि॒वेन॒ संमा॑ता व॒त्सो अ॒भ्येतु॒ रोहि॑तः ॥ (१०)
जो प्रजाएं तपोबल से प्रकट हुई हैं, जो गायत्री रूप वत्सों के साथ यहां आई हैं, वे कल्याण करने वाले चित्त से तुम में रमें. इन का वत्स सूर्य तुम्हारे पास आए. (१०)
The subjects who have appeared from Tapobal, who have come here with the Gayatri form vatsas, they are in you with the mind of welfare. The sun of these came to you. (10)