13.1.4Atharvaved
मंत्र:१३.१.४ (13.1.4)सूक्त (१)

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मंत्र:१३.१.४ (13.1.4)सूक्त (१)

रुहो॑ रुरोह॒ रोहि॑त॒ आ रु॑रोह॒ गर्भो॒ जनी॑नां ज॒नुषा॑मु॒पस्थ॑म् । ताभिः॒ संर॑ब्ध॒मन्व॑विन्द॒न्षडु॒र्वीर्गा॒तुं प्र॒पश्य॑न्नि॒ह रा॒ष्ट्रमाहाः॑ ॥ (४)

सूर्य उदय होते हुए आकाश पर चढ़ रहे हैं. छह उर्वियों की प्राप्ति के हेतु वे राष्ट्र को नित्यप्रति देखते हुए उर्वियों को प्राप्त करते हैं. (४)

The sun is rising and climbing the sky. To attain the six urvis, they get the urvis while looking at the nation every day. (4)