13.1.6Atharvaved
मंत्र:१३.१.६ (13.1.6)सूक्त (१)

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मंत्र:१३.१.६ (13.1.6)सूक्त (१)

रोहि॑तो॒ द्यावा॑पृथि॒वी ज॑जान॒ तत्र॒ तन्तुं॑ परमे॒ष्ठी त॑तान । तत्र॑ शिश्रिये॒ऽज एक॑पा॒दोऽदृं॑ह॒द्द्यावा॑पृथि॒वी बले॑न ॥ (६)

सूर्य ने आकाश और पृथ्वी को प्रकट किया. सूर्य ने उस में तंतु को बढ़ाया. एक पाद अज ने वहां आश्रय ले कर आकाश और पृथ्वी को बल से युक्त किया. (६)

The sun revealed the sky and the earth. The sun extended the fibers in it. One foot aj took shelter there and made the sky and the earth with force. (6)