13.2.10Atharvaved
मंत्र:१३.२.१० (13.2.10)सूक्त (२)

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मंत्र:१३.२.१० (13.2.10)सूक्त (२)

उ॒द्यन्र॒श्मीना त॑नुषे॒ विश्वा॑ रु॒पाणि॑ पुष्यसि । उ॒भा स॑मु॒द्रौ क्रतु॑ना॒ वि भा॑सि॒ सर्वां॑ल्लो॒कान्प॑रि॒भूर्भ्राज॑मानः ॥ (१०)

हे सूर्य देव! तुम उदय होने के बाद अपनी किरणों का विस्तार करते हो. तुम्हारे उदय होने पर सागर पर्यंत धरती पर यज्ञ कर्म आरंभ होते हैं. तुम गति करते हुए दोनों सागरों तथा समस्त लोकों को प्रकाशित करते हो. (१०)

O Sun God! You expand your rays after you rise. When you rise, yajna karma starts on earth till the ocean. You move and illuminate both the oceans and all the worlds. (10)