13.2.26Atharvaved
Sanskrit
यो वि॒श्वच॑र्षणिरु॒त वि॒श्वतो॑मुखो॒ यो वि॒श्वत॑स्पाणिरु॒त वि॒श्वत॑स्पृथः । सं बा॒हुभ्यां॑ भरति॒ सं पत॑त्त्रै॒र्द्यावा॑पृथि॒वी ज॒नय॑न्दे॒व एकः॑ ॥ (२६)
Hindi
अनेक सुखों वाले, सब को देखने वाले और सभी ओर किरणें फैलाने वाले सूर्य अपनी नीचे की ओर आती हुई किरणों के द्वारा आकाश और पृथ्वी को प्रकट करते हुए अपनी भुजाओं से सब का भरणपोषण करते हैं. (२६)
English
The sun, which has many pleasures, sees all and spreads rays all around, reveals the sky and the earth through its downward rays and nourishes everyone with its arms. (26)
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