13.6.1Atharvaved
Sanskrit
ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्च की॒र्तिश्च॒ यश॑श्चाम्भश्च॒ नभ॑श्च ब्राह्मणवर्च॒सं चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च ॥ य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑ ॥ (१)
Hindi
ब्रह्म, तप, कीर्ति, यश, जल, आकाश, ब्रह्मचर्य, अन्न और अन्न को पचाने की शक्ति व भूत, भविष्य, श्रद्धा, रुचि, स्वर्ग और स्वधा-ये सभी उस एक वृत अर्थात् ब्रह्म के ज्ञाता को प्राप्त होते हैं. (१)
English
Brahma, glory, fame, water, sky, celibacy, food, the power to digest food and past, future, faith, goal, heaven, self - all these are attained by the knower of Brahma. (1)
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