15.7.1Atharvaved
मंत्र:१५.७.१ (15.7.1)सूक्त (७)

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मंत्र:१५.७.१ (15.7.1)सूक्त (७)

स म॑हि॒मासद्रु॑र्भू॒त्वान्तं॑ पृथि॒व्या अ॑गच्छ॒त्स स॑मु॒द्रोऽभ॑वत् ॥ (१)

वह बड़ा समर्थ और गतिशाली हो कर पृथ्वी के अंत तक गया है और वह सागर बन गया. (१)

He has become very capable and dynamic and has gone to the end of the earth and he has become an ocean. (1)