16.7.3Atharvaved
मंत्र:१६.७.३ (16.7.3)सूक्त (७)

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मंत्र:१६.७.३ (16.7.3)सूक्त (७)

वै॑श्वान॒रस्यै॑नं॒ दंष्ट्र॑यो॒रपि॑ दधामि ॥ (३)

मैं इस बुरे स्वप्न को वैश्वानर अर्थात्‌ अग्नि की दाढ़ों में डालता हूं. (३)

I put this bad dream in the vines of Vaishvanar i.e. agni. (3)