18.3.2Atharvaved
मंत्र:१८.३.२ (18.3.2)सूक्त (३)
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उदी॑र्ष्वनार्य॒भि जी॑वलो॒कं ग॒तासु॑मे॒तमुप॑ शेष॒ एहि॑ । ह॑स्तग्रा॒भस्य॑ दधि॒षोस्तवे॒दंपत्यु॑र्जनि॒त्वम॒भि सं ब॑भूथ ॥ (२)
हे नारी! तू इस प्राणहीन पति के पास बैठी है. अब तू इस के पास से उठ. तू अपने पति से उत्पन्न हुए पुत्र, पौत्र आदि को प्राप्त हो गई है. (२)
O woman! You are sitting next to this lifeless husband. Now you get up from this. You have received a son, grandson, etc. born from your husband. (2)