20.3.1Atharvaved
मंत्र:२०.३.१ (20.3.1)सूक्त (३)

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मंत्र:२०.३.१ (20.3.1)सूक्त (३)

आ या॑हि सुषु॒मा हि त॒ इन्द्र॒ सोमं॒ पिबा॑ इ॒मम् । एदं ब॒र्हिः स॑दो॒ मम॑ ॥ (१)

हे इंद्र! आओ. तुम्हारे निमित्त सोम निचोड़ा गया है, इस का पान करो तथा मेरे द्वारा बिछाए गए कुशों पर बैठो. (१)

O Indra! Come. Soma has been squeezed for you, drink it and sit on the kushas laid by me. (1)