20.6.4Atharvaved
मंत्र:२०.६.४ (20.6.4)सूक्त (६)
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इन्द्र॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे तव॒ प्र य॑न्ति सत्पते । क्षयं॑ च॒न्द्रास॒ इन्द॑वः ॥ (४)
हे यजमानों का पालन करने वाले इंद्र! निचोड़ा गया और चंद्रमा की किरणों के समान सुख देने वाला यह सोम तुम्हारे पेट में जाता है. (४)
O Indra who follows the hosts! This Soma, which is squeezed and gives pleasure like the rays of the moon, goes into your stomach. (4)