4.5.1Atharvaved
मंत्र:४.५.१ (4.5.1)सूक्त (५)
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स॒हस्र॑शृङ्गो वृष॒भो यः स॑मु॒द्रादु॒दाच॑रत् । तेना॑ सह॒स्ये॑ना व॒यं नि जना॑न्त्स्वापयामसि ॥ (१)
कामनाओं एवं जल की वर्षा करने वाले सूर्य उदयाचल के समीपवर्ती सागर से उदय होते हैं. उदित एवं शत्रुओं को वश में करने वाले सूर्य के द्वारा हम अपने सामने स्थित व्यक्तियों को निद्रा-परवश बनाते हैं. (१)
The sun, which showers desires and water, rises from the sea near Udayachal. Through the sun that rises and controls enemies, we make the people in front of us sleep- control. (1)