4.5.3Atharvaved
मंत्र:४.५.३ (4.5.3)सूक्त (५)

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मंत्र:४.५.३ (4.5.3)सूक्त (५)

प्रो॑ष्ठेश॒यास्त॑ल्पेश॒या नारी॒र्या व॑ह्य॒शीव॑रीः । स्त्रियो॒ याः पुण्य॑गन्धय॒स्ताः सर्वाः॑ स्वापयामसि ॥ (३)

जो स्त्रियां आंगन में अथवा पलंग पर सो रही हैं अथवा जो स्त्रियां झूले आदि में सोने की अभ्यस्त हैं और उत्तम गंध वाली हैं, उन सब को मैं सुलाता हूं. (३)

I put all the women who are sleeping in the courtyard or on the bed or the women who are used to sleeping in the swing etc. and have a good smell. (3)