5.4.10Atharvaved
मंत्र:५.४.१० (5.4.10)सूक्त (४)

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मंत्र:५.४.१० (5.4.10)सूक्त (४)

शी॑र्षाम॒यमु॑पह॒त्याम॒क्ष्योस्त॒न्वो॒रपः॑ । कुष्ठ॒स्तत्सर्वं॒ निष्क॑र॒द्दैवं॑ समह॒ वृष्ण्य॑म् ॥ (१०)

सिर संबंधी रोग, नेत्र संबंधी व्याधियां एवं रोग उत्पन्न करने वाले पाप को कूठ ने दैवी बल पा कर इन सब को नष्ट कर दिया. (१०)

Kooth destroyed all these by getting divine strength from head diseases, eye diseases and diseases. (10)