5.4.3Atharvaved
मंत्र:५.४.३ (5.4.3)सूक्त (४)

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मंत्र:५.४.३ (5.4.3)सूक्त (४)

अ॑श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि । तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत ॥ (३)

यहां तीसरे देव स्थान में अश्वत्थ अर्थात्‌ पीपल विराजमान है. यहां देवों ने अमृत के समान गुण वाले कूठ को जाना. (३)

Here Ashwattha i.e. Peepal is seated in the third dev place. Here the devas came to know the kooth with the same quality as nectar. (3)