6.5.1Atharvaved
मंत्र:६.५.१ (6.5.1)सूक्त (५)

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मंत्र:६.५.१ (6.5.1)सूक्त (५)

उदे॑नमुत्त॒रं न॒याग्ने॑ घृ॒तेना॑हुत । समे॑नं॒ वर्च॑सा सृज प्र॒जया॑ च ब॒हुं कृ॑धि ॥ (१)

हे घृत के द्वारा बुलाए गए अग्नि देव! तुम इस यजमान को उत्तम पद प्राप्त कराओ. उत्तम पद प्राप्त कराने के पश्चात तुम इस यजमान को शारीरिक तेज से युक्त करो तथा पुत्र, पौत्र आदि से समृद्ध बनाओ. (१)

O God of agni called by Ghrit! You make this host get the best position. After attaining the best position, you should equip this host with physical radiance and enrich it with son, grandson etc. (1)