8.3.9Atharvaved
मंत्र:८.३.९ (8.3.9)सूक्त (३)

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मंत्र:८.३.९ (8.3.9)सूक्त (३)

ती॒क्ष्णेना॑ग्ने॒ चक्षु॑षा रक्ष य॒ज्ञं प्राञ्चं॒ वसु॑भ्यः॒ प्र ण॑य प्रचेतः । हिं॒स्रं रक्षां॑स्य॒भि शोशु॑चानं॒ मा त्वा॑ दभन्यातु॒धाना॑ नृचक्षः ॥ (९)

हे अग्नि देव! अपने भयंकर एवं उग्र तेज के द्वारा हमारे यज्ञ की रक्षा करो. हे दयालु मन वाले अग्नि देव! हमारे इस यज्ञ को देवों तक पहुंचाओ और यज्ञ की रक्षा करते हुए तुम राक्षसों को मारो. वे तुम्हें अपने वश में न कर सकें. (९)

O God of Agni! Protect our yajna with your fierce and fierce radiance. O God of agni with a kind heart! Take this yajna of ours to the gods and kill you demons while protecting the yajna. They can't control you. (9)