8.7.6Atharvaved
मंत्र:८.७.६ (8.7.6)सूक्त (७)

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मंत्र:८.७.६ (8.7.6)सूक्त (७)

जी॑व॒लां न॑घारि॒षां जी॑व॒न्तीमोष॑धीम॒हम् । अ॑रुन्ध॒तीमु॒न्नय॑न्तीं पु॒ष्पां मधु॑मतीमि॒ह हु॑वे॒ऽस्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये ॥ (६)

कल्याण के निमित्त मैं जीवन देने वाली एवं क्रोध न करने वाली जीवंती एवं अरुंधती नामक जड़ी बूटियों का आह्वान करता हूं. ये जड़ीबूटियां ऊपर की ओर बढ़ने वाली, पुष्पों से युक्त एवं मधु सहित हैं. (६)

For the sake of welfare, I call for life-giving and non-angry vibrancy and herbs called Arundhati. These herbs are upward-growing, flower-rich and honey-rich. (6)