9.1.6Atharvaved
मंत्र:९.१.६ (9.1.6)सूक्त (१)
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कस्तं प्र वे॑द॒ क उ॒ तं चि॑केत॒ यो अ॑स्या हृ॒दः क॒लशः॑ सोम॒धानो॒ अक्षि॑तः । ब्र॒ह्मा सु॑मे॒धाः सो अ॑स्मिन्मदेत ॥ (६)
उस विश्वरूप को कौन भलीभांति जानता है? उस का हृदय सोम को धारण करने के लिए कलश रूप में अक्ष अर्थात् विनाश रहित रहता है, इस का साक्षात्कार किस को है? शोभन बुद्धि वाले ब्रह्मा इस में आनंदित होते हैं. (६)
Who knows that world form very well? Who has the realization of his heart in the kalash form to hold soma, i.e. without destruction? Brahma with a beautiful intellect is blissful in this. (6)