9.1.7Atharvaved
मंत्र:९.१.७ (9.1.7)सूक्त (१)
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स तौ प्र वे॑द॒ स उ॒ तौ चि॑केत॒ याव॑स्याः॒ स्तनौ॑ स॒हस्र॑धारा॒वक्षि॑तौ । ऊर्जं॑ दुहाते॒ अन॑पस्पुरन्तौ ॥ (७)
उस के थन कभी दूध से शून्य न होने वाले एवं दूध की हजार धाराएं बहाने वाले हैं. ये थन सदैव दूध प्रदान करते रहते हैं. इन थनों को वही ब्रह्मा जानते हैं. (७)
His udders are never void of milk and are going to shed a thousand streams of milk. These udders always provide milk. Only Brahma knows these udders. (7)