9.8.1Atharvaved
मंत्र:९.८.१ (9.8.1)सूक्त (८)

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मंत्र:९.८.१ (9.8.1)सूक्त (८)

इ॒ष्टं च॒ वा ए॒ष पू॒र्तं च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑ ॥ (१)

जो अतिथि से पहले भोजन कर लेता है, वह अपने में होने वाले इष्टापूर्त कर्मों का फल खा लेता है. संध्या आदि नित्य कर्म इष्ट और किसी प्रयोजन से किए जाने वाले यज्ञ आदि कर्म आपूर्त कहलाते हैं. (१)

He who eats before the guest eats, he eats the fruits of the favored deeds in him. Sandhya etc. are called daily karma favored and yajna etc. karma done for some purpose are called apoorta. (1)