9.8.6Atharvaved
मंत्र:९.८.६ (9.8.6)सूक्त (८)

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मंत्र:९.८.६ (9.8.6)सूक्त (८)

श्रियं॒ च॒ वा ए॒ष सं॒विदं॑ च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑ ॥ (६)

जो अतिथि से पूर्व भोजन करता है, वह अपने घरों की श्री और सौमनस्य का विनाश करता है. (६)

He who eats before the guest destroys the shri and harmony of his houses. (6)